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  • By Santosh Chaturvedi 478 days ago
    कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः। लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि॥ भावार्थ : जनकादि ज्ञानीजन भी आसक्ति रहित कर्म द्वारा ही परम सिद्धि को प्राप्त हुए थे, इसलिए तथा लोक संग्रह को देखते हुए भ
  • By Santosh Chaturvedi 478 days ago
    मनोबुद्ध्यहंकारचित्ता नि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योमभूमिर्न तेजो न वायुः चिदानंदरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥ मैं मन, बुद्धि, अहंकार और स्मृतिनहीं हूँ, न मैं कान, जिह्वा, नाक और आ
  • By Santosh Chaturvedi 482 days ago
    "ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत: क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नम:"॥